Tuesday, June 17, 2008

मारे गए पत्रकारों की स्मृति में स्मारक

संयुक्त राष्ट्र के महासचिव बान की मून ने लंदन में एक स्मारक का अनावरण किया. यह उन पत्रकारों की याद में तैयार किया गया है जो रिपोर्टिंग करते मारे गए.
'ब्रीदिंग' नाम का यह स्मारक बीबीसी के मुख्यालय ब्रॉडकास्टिंग हाउस की छत पर स्थापित किया गया है.
यह एक रोशनी का एक स्तंभ है जिसकी ऊँचाई 32 फ़ुट है. इसका प्रकाश रात को आकाश में एक किलोमीटर तक चमकेगा.
हर रात आधा घंटे यह उस समय रौशन होगी जब बीबीसी का प्रमुख समाचार बुलैटिन प्रसारित होता है. यानी रात दस बजे.
यह स्मारक उन सभी पत्रकारों और उनके साथ काम करने वाले लोगों को समर्पित है, जो अपना काम करते हुए मारे गए, इनमें ड्राइवर हैं और अनुवादक भी.
पिछले दस सालों में औसतन हर हफ़्ते दो ऐसे पत्रकार मारे गए हैं जो युद्ध की रिपोर्टिंग करते हैं, कई अन्य पत्रकार भ्रष्टाचार की रिपोर्टिंग करते हुए मारे गए हैं.
श्रद्धांजलि
संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून ने उन पत्रकारों को श्रद्धांजलि अर्पित की है जो रिपोर्टिंग करते हुए मारे गए.
बीबीसी के पत्रकार अब्दुल रोहानी और नासेह दाहिर फ़राह की मौत हाल ही में हुई है
बान की मून ने कहा, "यह स्मारक उन लोगों की याद में खड़ा किया गया है जिन्होने अपनी जान गवाँ दी जिससे हम तक ख़बर पहुंच सके. लेकिन यह उन पत्रकारों के लिए भी है जो इस समय ख़तरों का सामना कर रहे हैं और रिपोर्टें भेजने के लिए अपनी जान को जोख़िम में डाल रहे हैं."
इस स्मारक के अनावरण के अवसर पर बीबीसी के महानिदेशक मार्क टॉमसन ने कहा कि समाचार जुटाने का काम दिन पर दिन ख़तरनाक होता जा रहा है. पिछले दस सालों में औसतन हर सप्ताह दो पत्रकार मारे जाते रहे हैं और 90 प्रतिशत मामलों में किसी पर मुक़दमा नहीं चला है.
अनावरण समारोह में उन पत्रकारों के परिजन भी आए थे जो या तो मारे गए या जिनकी हत्या हुई.
इनमें बीबीसी की प्रोड्यूसर केट पेटन के परिवार वाले थे जो 2005 में सोमालिया में मारी गई थीं और कैमरामैन साइमन कम्बर्स के सगे संबंधी भी जो सउदी अरब में मारे गए थे.
इस अवसर पर बीबीसी के वरिष्ठ पत्रकार जॉन सिम्पसन जो वर्ष 2003 में स्वयं एक अमरीकी मिसाइल हमले में मरते-मरते बचे थे उन्होंने जेम्स फ़ैंटन की एक कविता पढ़कर सुनाई.
पूर्व युद्ध रिपोर्टर और कवि जेम्स फ़ैंटन ने यह कविता विशेष तौर पर बीबीसी के लिए लिखी है.

Monday, June 9, 2008

ये ब्लॉग सिर्फ बेटियों के लिए है

Tuesday, April 01, 2008 05:38 [IST]
नई दिल्ली तकनीकी क्रांति के युग में नेट यूजर्स की संख्या में लगातार वृद्धि होती जा रही है। ब्लॉगिंग कल्चर इन दिनों सर्वाधिक लोकप्रिय है। अब एक ऐसा ब्लॉग आया है जो सिर्फ लड़कियों के लिए ही है। ‘बेटियों का ब्लॉग’ एक ऐसा ही ब्लॉग है, जिसमें माता-पिता अपनी बेटियों के बारे में बातें लिखते हैं।
यह एक सामुदायिक ब्लॉग है। जिसमें एक ही छत के नीचे कई ब्लॉगर माता-पिता इकट्ठा होकर अपनी बेटियों के बारे में बातें लिखते हैं। फिलहाल इस ब्लॉग के ग्यारह सदस्य हैं। इस ब्लॉग को शुरू करने वाले अविनाश दास ने अपने पहले पोस्ट में लिखा, ‘‘ये ब्लॉग बेटियों के लिए है। हम सब, जो सिर्फ बेटियों के बाप होना चाहते थे, ये ब्लॉग उनकी तरफ से बेटियों की शरारतें, बातें साझा करने के लिए है।’’
उन्होंने अपने इस पोस्ट का टाइटल रखा- ‘आइए बेटियों के बारे में बात करें।’ इस ब्लॉग पर लिखने वाले सभी ब्लॉगर अपनी बेटियों के बारे में सामान्य, लेकिन रोचक रिपोर्ट प्रकाशित कर रहे हैं। इसमें शामिल एक ब्लॉगर जितेन्द्र चौधरी का कहना है कि इसमें बेटियों के रोचक क्रियाकलापों को भी शामिल किया जाएगा। वहीं रविश कुमार ने ‘बाबा तुम बांग्ला बोलो तो’ में काफी रोचक अंदाज में बताते हैं कि चार साल की बेटी ‘तिन्नी’ उन्हें किस प्रकार बंगाली भाषा का ज्ञान दे रही हैं।
एक ब्लॉगर पुनीता ने ‘क्या बेटियां पराई होती हंै’ के शीर्षक से अपनी बात कहने की कोशिश की है। शादी के बाद पिता के साथ एक भेंट को उन्होंने काफी अलग अंदाज में बयां किया है।

ओबामा के लकी हनुमान

Monday, June 09, 2008 15:30 [IST]
न्यूयॉर्क. बात है तो अजीब लेकिन सच है! अमेरिकी राष्ट्रपति पद के लिए संभावित डेमोक्रेटिक उम्मीदवार बैरेक ओबामा व्हाइट हाउस की जंग जीतने के लिए हिंदू भगवान हनुमान का आशीर्वाद ले रहे हैं।
डेमोक्रेटिक पार्टी की तरफ से उम्मीदवारी हासिल करने के लिए 17 महीने की जद्दोजहद के बाद हिलेरी क्लिंटन को मात देने वाले ओबामा खुशकिस्मती के लिए अपने साथ छोटे से हनुमान को साथ लेकर चलते हैं।
टाइम्स के व्हाइट हाउस फोटो ऑफ द डे में प्रकाशित एक फोटो में पहली बार अश्वेत अमेरिकी प्रत्याशी का हुनमान प्रेम सामने आया है। ओबामा के पास एक ब्रेसलेट है जिसमें इराक में तैनात एक अमेरिकी सैनिक की यादें हैं, एक जुआरी की लकी चिट, एक छोटा सा वानर भगवान और छोटी सी मैडोना व एक बच्चे की आकृति है।
इस ब्रेसलेट में जो छोटे से वानर भगवान की आकृति है, वह बेशक हिंदू भगवान हनुमान की तरह ही है। प्रकाशित फोटो के साथ भी यह बात लिखी गई है लेकिन फोटोग्राफर ने इसकी पहचान का जिक्र नहीं किया है। केन्याई पिता और कैंसासी माता की संतान ओबामा ने अपना शुरुआती जीवन इंडोनेशिया में बिताया था जहां हिंदू धर्म काफी प्रचारित है।
लकी फैक्टर :इस फोटो के कैप्शन में यह भी लिखा गया है कि रिपब्लिक पार्टी के उम्मीदवार जॉन मैक्केन भी भाग्य में विश्वास करते हुए अपने लकी फैक्टर के रूप में अपनी कलाई पर एक रबर बैंड और एक निकेल बांधते हैं। एक स्वेटर और हैंपशायर में एक होटल रूम को भी वे लकी करार देते हैं।
दूसरी तरफ, हिलेरी क्लिंटन अपने लकी फैक्टर के रूप में अवाम द्वारा दिए गए तोहफों को तरजीह देती हैं। उनके प्रवक्ता के मुताबिक उन्हें टैक्सास में एक महिला ने एक लकी सिक्का व एक रूमाल दिया जिसे वे अक्सर अपनी जेब में रखे रहती हैं। इसी तरह ओहियो में एक महिला द्वारा दिए गए ब्रेसलेट को भी वे हमेशा पहने रहती हैं।

Sunday, June 8, 2008

अपहृत बीबीसी संवाददाता की हत्या

अफ़ग़ानिस्तान में बीबीसी के एक युवा संवाददाता की दक्षिणी हेलमंद प्रांत में गोली मारकर हत्या कर दी गई है.
अब्दुल समद रोहानी का शनिवार को अपहरण कर लिया गया था और रविवार को लश्कर गाह नाम के स्थान पर उनकी लाश पाई गई है.
बीबीसी ने रोहानी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा, "रोहानी की हिम्मत और लगन अफ़ग़ानिस्तान में बीबीसी की रिपोर्टिंग का अहम हिस्सा रही है."
रोहानी बीबीसी के काबुल स्थित ब्यूरो ऑफ़िस के लिए काम करते थे और बीबीसी की पश्तो सेवा के हेलमंद संवाददाता थे.
हेलमंद प्रांत में पिछले कुछ समय से तालेबान के छापामार लगातार हमले कर रहे हैं.
बीबीसी की ओर से जारी बयान में कहा गया है, "रोहानी और उनके साथियों की साहसिक रिपोर्टिंग की ही बदौलत बीबीसी अफ़ग़ानिस्तान का सच दुनिया के सामने ला पाती है."
इस बयान में कहा गया है, "उनकी मौत से हमें एक भारी सदमा लगा है और इस दुखद घड़ी में हमारी संवेदना उनके परिवार के साथ है."
इस वर्ष अफ़ग़ानिस्तान में पत्रकारों पर कई हमले हुए हैं, पिछले वर्ष भी अफ़ग़ानिस्तान में पाँच पत्रकार मारे गए थे.
यह सप्ताहांत बीबीसी के लिए ख़ासा बुरा रहा, इससे पहले सोमालिया में किसमायो में पत्रकार नश्ते दहीर की हत्या कर दी गई, दहीर बीबीसी और समाचार एजेंसी एपी के लिए रिपोर्टिंग किया करते थे.

Gmail - इनबॉक्स

‘हनुमान’ है इंजीनियरिंग कालेज के अध्यक्ष

06 जून 2008 आईबीएन-7 लखनऊ (उत्तर प्रदेश)। लखनऊ के एक तकनीकि संस्थान में एक मजेदार वाक्या सामने आया है। लखनऊ के ‘सरदार भगत सिंह टेक्नोलॉजी एण्ड मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट’ के चेयरमैन के पद पर बजरंगबली को बिठाया गया है और यह फैसला इसके ट्रस्टियों ने लिया है।दरअसल, ट्रस्टियों के बीच चेयरमैन के पद को लेकर आपस में किसी तरह का समझौता नहीं हो पा रहा था। इसीलिए यहां के ट्रस्टियों ने अपने आराध्य देव हनुमान को ही इस महत्वपूर्ण पद की जिम्मेदारी सौंप दी। अब इस कालेज की पूरी जिम्मेदारी हनुमान जी की देख-रेख में हो रही है।मजे की बात तो यह है कि इस कालेज में चेयरमैन का एक बड़ा कमरा है। कमरे के बाहर हनुमान जी के नाम का बोर्ड लगा हुआ है और चेयरमैन की कुर्सी पर हनुमान जी की प्रतिमा को बिठा दिया गया है। ट्रस्टियों ने चेयरमैन की सहायता के लिए एक वाइस-चेयरमैन (उपाध्यक्ष) भी नियुक्त किया है।उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी है कि वो सुबह कालेज के चेयरमैन हनुमान जी के कमरे में जाकर उनका दर्शन करें और उसके बाद अपने काम की शुरुआत करें। ‘सरदार भगत सिंह टेक्नोलॉजी एण्ड मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट’ के ट्रस्टी पंकज सिंह भदौरिया का कहना है कि, “हनुमान जी में हमारी अटूट श्रद्धा रही है, हम जो भी काम करते हैं उसकी शुरुआत हनुमान जी से ही करते हैं। इसलिए हम लोगों ने हनुमान जी को ही ये जिम्मेदारी सौंप दी।”ट्रस्टियों का यह तर्क भी है कि “हनुमान जी हर तरह का ज्ञान रखते हैं। इसलिए उनके लिए ये जिम्मेदारी तो बहुत ही छोटी है। लंकापति रावण के साथ हुए युद्ध में भगवान राम ने युद्ध के प्रबंधन की पूरी जिम्मेदारी हनुमान जी को ही दी थी। इसलिए हम लोगों ने उन्हें ये जिम्मेदारी सौंपी है।”वहीं, कालेज से जुड़े लोगों का मानना है कि जब से हनुमान जी ने इस कालेज के चेयरमैन पद की जिम्मेदारी संभाली है, कालेज में काफी सुधार देखने को मिल रहा है।

http://www.josh18.com/showvideo.php?id=220531

कम्प्यूटर से चलती पान की दुकान

7 जून 2008इंडो-एशियन न्यूज सर्विस
इंदौर। अभी तक आपने हजारों पान की दुकानें देखी होंगी मगर आज हम एक ऐसी पान की दुकान के बारे में आपको बताने जा रहे है जो औरों से अलग है। इसकी खासियत यह है कि यहां आपको सिर्फ एक बार अपना मीनू बताना पड़ता है क्योंकि यह पान की दुकान अत्याधुनिक है। दोबारा आने पर आपको मीनू नहीं अपना नाम बताना होता है और आपकी पसंद का पान हाजिर हो जाता है।इंदौर के बड़ा गणपति चौराहे पर स्थित ‘अप्सरा पान शॉप’ औरों से अलग है। इस दुकान में अन्य पान की दुकानों की तरह चमक-दमक तो है ही साथ ही ग्राहकों का ब्यौरा दर्ज करने के लिए कम्प्यूटर भी लगा है।यहां जो भी पान के शौकीन आते हैं उन्हें सिर्फ एक बार ही आपना मसाला बताना पड़ता है। दुकान के संचालक राम कृष्ण वर्मा बताते हैं उनके यहां जो ग्राहक आता है उसका मसाला कम्प्यूटर में दर्ज कर दिया जाता है साथ ही उसे एक ‘ग्राहक नम्बर’ भी दिया जाता है।पढ़ें
: ताज को वोट दें और मुफ्त में पान खाएं अगली दफा जब वही ग्राहक पुन: दुकान पर पहुंचता है तो उसे सिर्फ अपना नाम और ‘ग्राहक नम्बर’ बताना होता है और कुछ ही देर में उसकी पसंद का पान हाजिर हो जाता है। इससे राम कृष्ण को तो लाभ हो ही रहा है साथ में ग्राहकों का भी समय बच जाता है।राम कृष्ण बताते कि उनके नियमित ग्राहक अपने घर अथवा दफ्तर से निकलने से पहले ही फोन करके अपना ग्राहक नम्बर बता देते हैं और उन्हें आते ही पान तैयार मिल जाता है। इतना ही नहीं घर और दफ्तर तक उन्होंने पान भेजने की भी व्यवस्था कर रखी है। इसके लिए उनकी दुकान पर 40 कर्मचारियों को रखा गया है।राम कृष्ण की दुकान का पान खाने वाले देश और विदेश में भी है। उन तक भी पान पहुंचाने का इंतजाम उनके पास है। राम कृष्ण के कम्प्यूटर में 4,000 से अधिक ग्राहकों के रिकॉर्ड दर्ज हैं, जिसकी पसंद कम्प्यूटर बता देता है।वे जल्दी ही ऑनलाइन सुविधा शुरू करने वाले हैं।

Saturday, June 7, 2008

जालौरः पंकज मुनि की अनोखी तपस्या

07 जून 2008 आईबीएन-7जालौर(राजस्थान)। तपती दुपहरी और आग के बीच भी इस समय एक साधु परमात्मा का सच जानने के लिए साधना कर रहे हैं। ये साधना जालौर के मालवाड़ गांव में हो रही है। साधना में लीन होनेवाले इस साधु का नाम पंकज मुनि है। पंकज मुनि की ये साधना कुल 41 दिनों तक चलेगी।अपनी इस साधना के बारे में खुद पंकज मुनि बताते हैं कि, “मेरी ये साधना अंधविश्वास से छुटकारा और भगवान की तलाश के लिए है।”पंकज मुनि इस समय खुले आसमान में रेगिस्तान की तपती गर्मी के बीच चारों तरफ जलते हुए उपलों के बीच में बैठकर अपनी साधना में मग्न हैं। इस अग्निसाधक के दर्शन के लिए यहां आस-पास के काफी लोग आने लगे हैं। पंकज मुनि दिन के 11 बजे से शाम 5 बजे तक ये साधना कर हैं। वैसे तो पंकज मुनि की चमड़ी अब झुलसने लगी है, लेकिन उनकी साधना पर इसका कोई असर नहीं पड़ रहा है।उनकी ये साधना को देखकर यहां के लोग अब पंकज मुनि को भगवान शिव का अवतार मानने लगे हैं। उनका आर्शीवाद लेने के लिए हजारों की संख्या में लोग साधना स्थल पर जुटने लगे हैं। साधना स्थल से उठने के बाद रोज शाम पांच बजे पंकज मुनि भक्तों को प्रवचन देते हैं।

Friday, June 6, 2008

उमर अब्दुल्लाह नज़र आएंगे फ़िल्म में

जुलाई में भारत के सिनेमाघरों में एक फ़िल्म दिखाई जाएगी जिसका नाम है - मिशन इस्तांबूल. आप समझ सकते हैं कि इसमें ख़ास क्या बात है, हर महीने बहुत सी फ़िल्में सिनेमाघरों में दिखाई जाती हैं.
ख़ास बात ये है कि इस फ़िल्म में भारत प्रशासित कश्मीर के नेता उमर अब्दुल्लाह भी नज़र आएंगे. उमर अब्दुल्लाह नेशनल कान्फ्रेंस के मौजूदा अध्यक्ष हैं.
वह पूर्व मुख्यमंत्री फ़ारूक़ अब्दुल्लाह के बेटे और कश्मीर में एक बड़ा नाम माने जाने वाले शेख़ अब्दुल्लाह के पोते हैं. उमर अब्दुल्लाह केंद्र में मंत्री भी रह चुके हैं.
मिशन कश्मीर की ही तरह मिशन इस्तांबूल भी आतंकवाद के बारे में एक फ़िल्म है. मिशन इस्तांबूल में ख़ुद उमर अब्दुल्लाह एक विशेष भूमिका में नज़र आते हैं.
यह भूमिका कोई अभिनय की तो नहीं है मगर फ़िल्म में अभिनेत्री ने कश्मीर की स्थिति और मीडिया की भूमिका के बारे में उमर अब्दुल्लाह का इंटरव्यू किया है.
उमर अब्दुल्लाह इस इंटरव्यू में कश्मीर की स्थिति के बारे में मीडिया की भूमिका की आलोचना करते नज़र आते हैं, "कश्मीर में अच्छी बातों को मीडिया ख़बरें नहीं बनाता है. जब तक कोई बम धमाका ना हो, कोई मारा ना जाए, तब तक यहाँ कोई ख़बर नहीं बनती है."
उमर अब्दुल्लाह कहते हैं, "कश्मीर में इतनी सारी अच्छी बातें हो रही हैं मसलन, बहुत से सैलानी आ रहे हैं, लेकिन यह सबकुछ मीडिया में उस तरह से जगह नहीं पाता है जैसा कि हिंसक घटनाओं को ख़ूब ज़ोरशोर से रिपोर्ट किया जाता है."
'राजनीति से फ़िल्में'
अलबत्ता उमर अब्दुल्लाह ये डायलॉग स्क्रिप्ट से बोलते हैं लेकिन उनका कहना है कि जो कुछ भी उन्होंने इस फ़िल्म में कहा है वह उनका ख़ुद का अनुभव भी है.
एक ही बात कई बार...
वह जो ख़ुद समझते और सोचते हैं वही बोलते हैं लेकिन फ़िल्म में उन्होंने यह बात स्क्रिप्ट देखकर कही है और वो भी अलग-अलग अंदाज़ से. एक ही बात को कई बार कहना पड़ा.

उमर अब्दुल्लाह
हालाँकि पटकथा को देखकर डॉयलॉग बोलते हुए उन्हें कुछ अटपटा लगा और उनका कहना है, "वह जो ख़ुद समझते और सोचते हैं वही बोलते हैं लेकिन फ़िल्म में उन्होंने यह बात स्क्रिप्ट देखकर कही है और वो भी अलग-अलग अंदाज़ से. एक ही बात को कई बार कहना पड़ा."
उमर अब्दुल्लाह ने बताया कि उन्हें क़रीब एक सप्ताह पहले स्क्रिप्ट दे दी गई थी और उसे ज़ुबानी याद करने के लिए कहा गया था.
उमर अब्दुल्लाह के लिए मीडिया को इंटरव्यू देना एक आम बात है लेकिन फ़िल्म में यह इंटरव्यू देने के लिए उन्हें कुछ रीटेक करने पड़े यानी एक ही दृश्य को कई बार दोहराना पड़ा.
उमर अब्दुल्लाह को उस अभिनेत्री का नाम तो याद नहीं है जिन्होंने फ़िल्म में उनका इंटरव्यू किया है लेकिन फ़िल्म में विवेक ओबेरॉय और ज़ायद ख़ान जैसे अभिनेताओं ने काम किया है.
उमर अब्दुल्लाह का इंटरव्यू इस फ़िल्म में राजस्थान की राजधानी जयपुर के एक बाग में दर्शाया गया है. हालाँकि उमर अब्दुल्लाह ने यह फ़रमाइश रखी थी कि यह इंटरव्यू कश्मीर में उनके घर में होना चाहिए था लेकिन इतनी बड़ी फ़िल्म यूनिट को वहाँ नहीं ले जाया जा सकता था.
उमर कहते हैं कि उन्होंने अपने स्कूल के एक साथी की गुज़ारिश पर इस फ़िल्म में यह इंटरव्यू दिया है, वैसे उनका राजनीति छोड़कर फ़िल्मी दुनिया में जाने का कोई इरादा नहीं है.

Tuesday, June 3, 2008

गंजेपन का इलाज़ हो सकता है आसान

जो लोग गंजेपन से परेशान हैं उनके लिए एक अच्छी ख़बर है. आरंभिक जाँच में यह बात सामने आई है कि प्रयोगशालाओं में विकसित बालों की कोशिकाओँ के ज़रिए गंजेपन का इलाज़ संभव है.
इस तकनीक में आदमी के सिर के बचे बालों की कुछ कोशिकाओं को लेकर उसे प्रयोगशाला में कई गुणा बढ़ाया जाता है और फिर उसे सिर के उन हिस्सों मे प्रतिरोपित किया जाता है जहाँ बाल झड़ चुके होते हैं.
ब्रिटेन के शोधार्थियों का कहना है कि छह महीने के इस इलाज के बाद 19 में से 11 लोगों के सिर में नए बाल उग आए.
हालाँकि ब्रिटेन के एक विशेषज्ञ का कहना है कि इस प्रयोग में अभी और काम बाकी है जिससे नए बाल अच्छे नज़र आएँ.
आदमी में गंजापन अर्थात बालों का झड़ना (एंड्रोजेनेटिक एलोपेसिया) एक आनुवांशिक बीमारी है. पचास वर्ष की आयु के बाद क़रीब चालीस प्रतिशत लोग दुनिया में गंजेपन से पीड़ित हैं.
नई विधि
बालों के प्रतिरोपण की अभी जो विधि अपनाई जाती है उसमें सिर के बचे हुए बालों के बड़े गुच्छों को एनेस्थीज़िया यानी चेतनाशून्य करने वाली दवा की सहायता से मनचाहे हिस्सों में प्रतिरोपित कर दिया जाता है.
मुझे लगता है कि इससे बालों की देख भाल में क्रांतिकारी परिवर्तन आ जाएगा. जैसे ही लोगों को पता लगेगा कि वे गंजे हो रहे हैं वे इस विधि को अपना सकते हैं

कंपनी के वैज्ञानिक, डॉक्टर पॉल केंप
इस विधि की पूरी सफलता सिर के बचे हुए बालों पर निर्भर करती है. इसमें कोई नए बाल नहीं उगाए जा सकते हैं.
इस नई विधि को तैयार करने वाली ब्रिटेन की कंपनी इंटरसाइटेक्स का कहना है कि इसके सहारे प्रतिरोपण के लिए बालों की असंख्य कोशिकाएँ उपलब्ध कराई जा सकती हैं.
कंपनी का कहना है कि यदि अन्य जाँच भी सफ़ल रहे तो पाँच वर्षों में इस तकनीक को बाज़ार में लाया जा सकता है.
कंपनी के वैज्ञानिक डॉक्टर पॉल केंप ने कहा, "मुझे लगता है कि इससे बालों की देख भाल में क्रांतिकारी परिवर्तन आ जाएगा. जैसे ही लोगों को पता लगेगा कि वे गंजे हो रहे हैं, वे इस विधि को अपना सकते हैं."

Saturday, May 24, 2008

कार के साथ पिस्तौल मुफ़्त!

Marwar News!
अमेरिका में एक कार डीलर ने अपने ग्राहकों को हर कार के साथ मुफ़्त में पिस्तौल देने की पेशकश की है.
मसूरी के 'मैक्स मोटर' का कहना है कि जबसे ये ऑफ़र रखा गया तब से कार बिक्री में चौगुनी वृद्धि हो गई है.
इस ऑफ़र में ग्राहकों को पिस्तौल या 250 डॉलर के गैस कार्ड में से एक को चुनने की सहूलियत है लेकिन अभी तक अधिकतर ग्राहकों को कार के साथ पिस्तौल ही पसंद आ रही है.
कंपनी के मालिक मार्क मलर का कहना है “हमें इस बात की बेहद ख़ुशी है कि हम एक ऐसे स्वतंत्र देश में रहते हैं जहाँ आप ज़रूरत पड़ने पर अपने साथ पिस्तौल रख सकते हैं.”
ये डीलर नई और पुरानी वाहन बेचता है जिसमें जनरल मोटर्स और फ़ोर्ड की कारें और ट्रकें शामिल हैं.
इस डीलर ने अपनी दुकान का जो लोगो बनवाया है उसमें भी एक काउब्वाय को पिस्तौल लिए दिखाया गया है.
डीलर ने तीन दिनों में ही 30 ट्रकें और कारें बेची हैं और इसका श्रेय वह इस ऑफ़र को ही देते हैं.
मलर का कहना है, "कनाडा के एक ग्राहक और एक बूढ़े व्यक्ति को छोड़कर अब तक सभी ने पिस्तौल को ही चुना है. इन दोनों ग्राहकों ने गैस कार्ड लेना पसंद किया था."
वे अपने ग्राहकों को एक ऐसी पिस्तौल का मॉडल चुनने की सलाह देते हैं जो जेब में आसानी से रखी जा सकती है.
डीलर का कहना है कि इस ऑफ़र का आइडिया उन्हें डेमोक्रेटिक पार्टी की ओर से राष्ट्रपति पद के संभावित उम्मीदवार बराक ओबामा के एक भाषण से मिला.
वे बताते हैं कि इस भाषण में ओबामा ने सहानुभूति जताते हुए ज़िक्र किया था कि लोग बाइबल ओर पिस्तौल को बराबर अहमियत देने लगे हैं. उनका कहना था कि लोग रविवार को पिस्तौल लेकर चर्च जाने लगे हैं.
इस ऑफ़र का विज्ञापन वेबसाइट पर है और यह इस महीने के अंत तक जारी रहेगा.
इस विज्ञापन में ज़िक्र किया गया है कि पिस्तौल रखने के लिए किसी भी व्यक्ति की पृष्ठभूमि की जाँच-परख आवश्यक होती है.

Monday, May 19, 2008

बांग्लादेशियों की धरपकड़ शुरु


Marwar News!
राजस्थान की राजधानी जयपुर मे हुए बम धमाकों में कथित तौर पर बांग्लादेश के एक गुट का नाम सामने आने के बाद पुलिस ने राज्य भर में बांग्लादेशी नागरिकों की धरपकड़ शुरु कर दी है.
हालांकि राज्य मे कितने बांग्लादेशी है इसे लेकर ख़ुद भारतीय जनता पार्टी सरकार भ्रम में है.
कांग्रेस विधायक डॉक्टर चन्द्रशेखर बेद आंकड़ो का हवाला देकर कहते हैं, "बीजेपी सरकार जानकारी होने के बाद भी कार्रवाई नही कर पाई. क्योंकि इस सरकार के पास इच्छाशक्ति है ही नही."
वामपंथी संगठन कह रहे हैं कि अगर बांग्ला जुबान बोलने वाले भारतीयों को निशाना बनाया गया तो वो विरोध करेंगे.
पुलिस धरपकड़ मे अब तक क़रीब 12 बांग्लादेशियों को गिरफ़्तार किया गया है. इनमें से आठ को अजमेर मे गिरफ़्तार किया गया है.
''यहाँ पश्चिम बंगाल से ग़रीब मज़दूर सोने-चांदी और जवाहरात का काम करने आते रहे है. ऐसे लोगों को बांग्लादेशी बता कर अगर सताया गया तो हम इसे सहन नही करेंगे. क्योंकि पहले भी ऐसा हो चुका है.

वामपंथी नेता वकार उल अहद
पुलिस के अनुसार राज्य भर मे बांग्लादेशियों की जाँच का अभियान चलाया जा रहा है जो एक महीने तक चलेगा.
राज्य के संसदीय कार्य मंत्री राजेंद्र राठौर के मुताबिक जयपुर में पहले सर्वेक्षण मे बांग्लादेशियों की तादाद ढाई हज़ार पाई गई थी लेकिन अब इनकी संख्या दस हज़ार से कम नही है.
उधर, डेढ़ साल पहले गृह मंत्री गुलाबचंद कटारिया ने राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की मौजूदगी में अपने भाषण मे कहा था कि राजस्थान में पचास हज़ार बांग्लादेशी रह रहे है.
लेकिन दूसरी ओर, कांग्रेस विधायक बेद ने सरकार से सवाल पूछा तो जवाब आया कि जयपुर शहर में 916 और ग्रामीण जयपुर मे 345 बांग्लादेशी हैं. भरतपुर मे आठ बांग्लादेशी रह रहे हैं.
सरकार ने माना कि इनमें से कुछ बांग्लादेशियों को राशन कार्ड मिल चुके है, कुछ का नाम मतदाता सूची में शामिल हो चुका है और कुछ ऐसे भी हैं जो ड्राइविंग लाइसेंस ले चुके है.
ये तथ्य सामने आने बाद भी सरकार इन दस्तावेज़ों को ख़ारिज नहीं कर सकी है.
अदालत की टिप्पणी
पिछले वर्ष जयपुर की एक अदालत ने बांग्लादेशियों के बारे में सरकार पर तीखी टिप्पणी की थी.
अदालत ने कहा की सरकार ऐसे गंभीर मामले पर ध्यान नही दे रही है. अदालत ने मुख्य सचिव को भी इस बारे मे सूचित किया था.
विपक्ष के विधायक बेद कहते हैं, "इन प्रमाणों से साफ़ है की सरकार ऐसे ज्वलंत मुद्दों के लिए समय नही निकल पा रही है और बांग्लादेशियों पर उसकी चिल्ल-पो महज सियासी है."
वामपंथी नेता वक़ार उल अहद ने बीबीसी से कहा, "बांग्लादेशी क्या किसी भी विदेशी को हमारी सर जमीं पर रहने का हक़ नही है. आख़िर बांग्लादेशी यहाँ तक कैसे चले आते है."
बीजेपी सरकार जानकारी होने के बाद भी कार्रवाई नही कर पाई. क्योंकि इस सरकार के पास इच्छाशक्ति है ही नही

कांग्रेस के विधायक, चंद्रशेखर बेद
लेकिन वक़ार ये भी कहते हैं कि यदि बांग्ला भाषा बोलने वाले पश्चिम बंगाल के लोगों को निशाना बनाया तो वे विरोध करेंगे.
वे कहते हैं, ''यहाँ पश्चिम बंगाल से ग़रीब मज़दूर सोने-चांदी और जवाहरात का काम करने आते रहे है. ऐसे लोगों को बांग्लादेशी बता कर अगर सताया गया तो हम इसे सहन नही करेंगे. क्योंकि पहले भी ऐसा हो चुका है."
संसदीय कार्य मंत्री राठौर कहते हैं, "इनमें से ज्यादातर बांग्लादेशी अपना पता-ठिकाना पश्चिम बंगाल के कूच बिहार और चौबीस परगना जैसे ज़िलों का बताते है. लेकिन हम इनकी गहराई से जाँच करेंगे. पुलिस को जाँच का काम एक महीने मे पूरा करने को कहा गया है."
उधर विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल जैसे संगठनो ने बांग्लादेशियों के विरुद्ध जनजागरण अभियान चलाने का ऐलान किया है.
बहरहाल बांग्लादेशी नागरिकों का मुद्दा सरकार के गले की फांस बन गया है.

Monday, May 12, 2008

नैनो के बाद अब सबसे सस्ता लैपटाप

Marwar News!
नई दिल्ली। अभी दुनिया की सबसे सस्ती कार (टाटा की नैनो) की चर्चा खत्म भी नहीं हुई है कि एक अन्य भारतीय कंपनी ने दुनिया का सबसे सस्ता लैपटाप बाजार में उतारने का ऐलान कर दिया है।
आईटी क्षेत्र में दुनिया भर में अपनी धाक जमा चुकी एचसीएल इन्फोसिस्टम्स लिमिटेड 'माइलीप' के ब्रांड नाम से दो तरह के लैपटाप उतारने जा रही है। इनमें एक्स सीरीज के तहत लैपटाप की कीमत केवल 13 हजार 990 रुपये रखी गई है। ज्यादा सुविधाओं वाले वाई सीरीज के लैपटाप की कीमत 29 हजार 990 रुपये तय की गई है। 26 जनवरी 2008 से ये लैपटाप देश भर में मिलने शुरू हो जाएंगे।
एचसीएल के चेयरमैन एवं सीईओ अजय चौधरी ने एक संवाददाता सम्मेलन में इन उत्पादों को सार्वजनिक तौर पर पेश किया। टाटा की लखटकिया नैनौ कार के आने के महज पांच दिन बाद सबसे सस्ते लैपटाप की लांचिंग को उन्होंने महज एक इत्तेफाक बताया। चौधरी के मुताबिक जिस तरह नैनो के आने के बाद एक दूधवाला या छोटा-मोटा व्यवसाय करने वाला व्यक्ति भी कार खरीदने का सपना सच कर सकेगा, उसी तरह माइलीप भी आईटी को अब समाज के कमजोर तबके तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाएगा। उन्होंने बताया कि खास तौर पर विद्यार्थियों, बिक्री व बीमा एजेंटों और काम के सिलसिले में अक्सर यात्रा करने वाले प्रोफेशनल्स के लिए यह एक उपयोगी उत्पाद साबित हो सकता है।
दोनों कंप्यूटरों का वजन बेहद हल्का है। इसमें सात इंच की स्क्रीन है। बेहद छोटा होने की वजह से इसे पार्को, ट्रेन, बस, विमान या मेट्रो ट्रेन में ले जाने में किसी प्रकार की दिक्कत आने की संभावना नहीं है। इनमें इंटेल का प्रोसेसर लगा हुआ है। एक्स सीरीज लाइनेक्स और विंडोज दोनों से ही चलने वाले आपरेटिंग सिस्टम से लैस है। इनमें वाई-फाई की भी सुविधा है। इसके अलावा वायरलेस कनेक्टिविटी, 80 जीबी का हार्ड डिस्क एवं ब्लूटूथ जैसी सुविधाएं तो हैं ही। वाई सीरीज में माइक्रोसाफ्ट विस्टा होम प्रीमियम लगा हुआ है। इसकी डिस्पले स्क्रीन 360 डिग्री तक घूम सकती है। यही नहीं, इसका डिजाइन इस तरह से तैयार किया गया है कि धूल, धूप व पानी का इस पर कोई खास असर नहीं पड़ेगा।
दूसरे शब्दों में कहें तो एक सामान्य पर्सनल कंप्यूटर से आप जितने भी काम करना चाहते हैं वे सभी इस छोटे से लैपटाप के जरिए संभव हैं। शायद इसे ही ध्यान में रखकर चौधरी ने उम्मीद जताई है कि इसे बेचने के लिए ग्राहकों की प्रतीक्षा सूची बनानी पड़ेगी।

Sunday, May 11, 2008

एक दशक बाद नहीं दिखेंगे गिद्ध!

MarwarNews!
वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि अगले दस सालों में एशियाई गिद्ध विलुप्त हो सकते हैं.
इसके लिए जानवरों को दी जाने वाली एक दवा को दोषी ठहराया गया है.
सर्वेक्षण करने वाली टीम का कहना है कि हालांकि सरकार ने जानवरों को दर्द के लिए दी जाने वाली दवा डाइक्लोफ़ेनाक पर प्रतिबंध लगा दिया है लेकिन इसे अभी भी किसानों को बेचा जा रहा है.
यह नया सर्वेक्षण बॉम्बे नेचरल हिस्ट्री सोसायटी के जर्नल में प्रकाशित किया गया है.
सर्वेक्षण रिपोर्ट में कहा गया है कि सफ़ेद पूँछ वाले एशियाई गिद्धों की संख्या 1992 की तुलना में 99.9 प्रतिशत तक कम हो गई है.
इसके अनुसार लंबे चोंच वाले और पतले चोंच वाले गिद्धों की संख्या में भी इसी अवधि में 97 प्रतिशत की कमी आई है.
ज़ूलॉजिकल सोसायटी ऑफ़ लंदन के एंड्र्यू कनिंघम इस रिपोर्ट के सहलेखक भी हैं. वे कहते हैं, "इन दो प्रजातियों के गिद्ध तो 16 प्रतिशत, प्रतिवर्ष की दर से कम होते जा रहे हैं."
उनका कहना है, "यह तथ्य अपने आपमें डरावना और विचलित करने वाला है कि सफ़ेद पूँछ वाले गिद्ध हर साल 40 से 45 प्रतिशत की दर से कम होते जा रहे हैं."
ख़तरनाक दवा
इससे पहले भी वैज्ञानिकों ने कहा था कि यदि भारत में लगातार विलुप्त हो रहे गिद्धों को बचाना है तो जानवरों को दी जाने वाली दवा को बदलना होगा.
इससे पहले प्रकाशित रिपोर्ट में कहा गया था कि इस दवा को खाने वाले जानवरों का मांस खाकर पिछले सालों में गिद्ध की प्रजाति लगातार ख़त्म हुई है.
शोधकर्ताओं ने सलाह दी थी कि जानवरों को डाइक्लोफ़ेनाक नाम की दर्दनाशक दवा को बंद कर देना चाहिए.
भारत सरकार ने इसे वर्ष 2006 में प्रतिबंधित भी कर दिया गया था लेकिन भारतीय और ब्रिटिश शोधकर्ताओं का कहना है कि इस प्रतिबंध का कोई ख़ास असर नहीं हुआ है.
उनका कहना है कि जानवरों के लिए डाइक्लोफ़ेनाक दवा के निर्माण पर प्रतिबंध लगा दिया गया है लेकिन अब लोग मनुष्यों के लिए बन रही दवा का उपयोग जानवरों के लिए कर रहे हैं.
उनका कहना है कि दवा का आयात किया जा रहा है और इसका उपयोग हो रहा है.
इससे पहले शोधकर्ताओं ने डाइक्लोफ़ेनाक की जगह मेलोक्सिकैम नाम की दवा के उपयोग की सलाह दी थी लेकिन चूँकि वह डाइक्लोफ़ेनाक की तुलना में दोगुनी महंगी है इसलिए इसका उपयोग नहीं हो रहा है.
उपयोगी गिद्ध
हर साल आधी होती जा रही है गिद्धों की जनसंख्या
वैसे तो गिद्ध भारतीय समाज में एक उपेक्षित सा पक्षी है लेकिन साफ़-सफ़ाई में इसका सामाजिक योगदान बहुत महत्वपूर्ण है.
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि गिद्धों के विलुप्त होने की रफ़्तार यही रही तो एक दिन ये सफ़ाई सहायक भी नहीं रहेंगे.
जैसा कि वे बताते हैं 90 के दशक के शुरुआत में भारतीय उपमहाद्वीप में करोड़ों की संख्या में गिद्ध थे लेकिन अब उनमें से कुछ लाख ही बचे हैं.
वैज्ञानिकों का कहना है कि गिद्धों को न केवल एक प्रजाति की तरह बचाया जाना ज़रुरी है बल्कि यह पर्यावरणीय संतुलन के लिए भी ज़रुरी है.
वे चेतावनी देते रहे हैं कि गिद्ध नहीं रहे तो आवारा कुत्तों से लेकर कई जानवरों तक मरने के बाद सड़ते पड़े रहेंगे और उनकी सफ़ाई करने वाला कोई नहीं होगा और इससे संक्रामक रोगों का ख़तरा बढ़ेगा.

भजन गाओ और तनाव दूर भगाओ

MarwarNews!
लंदन. यदि आप उच्च रक्तचाप और तनाव से पीड़ित हैं तो दवाओं पर पैसा बहाने की बजाए किसी मंदिर में जाकर भजन-कीर्तन में हिस्सा लें।
डेली मेल में प्रकाशित रिपोर्ट में ब्रिटिश शोधकर्ताओं ने दावा किया है कि लोगों को प्राणायाम की शिक्षा देने तथा भजन-कीर्तन या मंत्रोच्चर जैसी धुन का प्रयोग करने पर उनमें तनाव का स्तर कम हुआ और उनकी भावनात्मक स्थिति सकारात्मक हुई। शोधकर्ताओं ने इस तथ्य की पुष्टि के लिए कि चर्च में पुरुष गान समूहों में गाए जाने वाले ग्रेगोरियन पद्धति के भजन से तनाव कम होता है, वियना के प्राचीन ईसाई मठ के भिक्षुओं के दिल की धड़कन और ब्लड प्रेशर पर 24 घंटे तक निगाह रखी। भजन के दौरान दोनों न्यूनतम स्तर पर पाए गए।
* ग्रेगोरियन पद्धति के भजन का सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। यह तनाव घटाकर व्यक्ति की कार्यक्षमता बढ़ा सकता है।- डॉ. एलैन वाटकिंस, वरिष्ठ व्याख्याता, न्यूरोसाइंस, इंपीरियल कालेज लंदन

माँ का दूध पीने वाले ज्यादा स्मार्ट!

Good News!
लंदन.माँ का दूध पीकर बड़े होने वाले बच्चे बोतल या डिब्बा बंद दूध पीने वाले बच्चों की तुलना में अधिक स्मार्ट होते हैं।
लंदन स्थित मेकगिल विश्वविद्यालय के प्रो. मिशेल क्रेमर द्वारा हाल ही में किए गए शोध में यह बात सामने आई है। उन्होंने बताया कि नैसर्गिक रूप से दुग्धपान करने वाले बच्चे बड़े होकर अधिक कुशाग्र बुद्धि के होते हैं और ऐसे बच्चे न सिर्फ पढ़ाई-लिखाई में तेज होते हैं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारियों को भी अधिक कुशलता से निभाते हैं।
प्रो. क्रेमर ने कहा कि उनके इस शोध से दुग्धपान को बढ़ावा देने के लिए चल रही विश्वव्यापी मुहिम को प्रभावी बनाने में सहयोग मिलेगा। उन्होंने बताया कि 14 हजार बच्चों पर किए गए शोध में पाया गया कि दुग्धपान करने वाले बच्चों की बुद्धिमत्ता का स्तर (आईक्यू) कृत्रिम दूध पीने वाले बच्चों की तुलना में अधिक होता है।

कश्मीर में मुठभेड़ ख़त्म, आठ की मौत

Good News!
भारत प्रशासित कश्मीर के सांबा इलाक़े में सेना के साथ मुठभेड़ मे दो चरमपंथियों समेत आठ लोग मारे गए है.
मुठभेड़ में 11 लोग घायल भी हुए हैं. मारे गए लोगों में सेना के दो जवान भी शामिल हैं.
डीआईजी पुलिस फ़ारुख खान का कहना है कि कि मुठभेड़ ख़त्म हो गई है और दो चरमपंथी मारे गए हैं. मारे गए लोगों में दो महिलाएँ और एक स्थानीय अख़बार का वरिष्ठ फ़ोटो पत्रकार शामिल है.
घायलों में एक मेजर, पुलिस अधिक्षक (ऑपरेशन्स) और टीवी चैनल आईबीएन सेवन का वीडियोग्राफ़र शामिल है.
जम्मू के क़रीब सांबा के केलीमंडी इलाक़े में रविवार सुबह चरमपंथियों ने अचानक फ़ायरिंग शुरू कर दी. हमला करने के बाद चरमपंथी क़रीब के ही मकानों में छिप गए.
सुरक्षाबलों ने इस मकान को घेर लिया. चरमपंथियों ने इस दौरान कुछ ग्रेनेड भी इस्तेमाल किए और कुछ लोगों को मकानों के अंदर ही बंदी बना लिया.
मुठभेड़
चरमपंथी दो घरों में छिपे गए. सुरक्षाबलों और चरमपंथियों के बीच रुक रुक कर गोलियाँ चलती रहीं. एक महिला जो उस घर में छुपी हुई थी, उसकी इस गोलीबारी में मौत हो गई.
मुठभेड़ में फोटो पत्रकार अशोक सोढ़ी की मौत हो गई
घर में फंसी एक अन्य महिला और दो बच्चों को सुरक्षाबलों ने बचा लिया. इस मुठभेड़ में एक स्थानीय अख़बार के वरिष्ठ फ़ोटो पत्रकार अशोक सोढी भी मारे गए हैं.
साथ ही एक जवान अतुल कुमार की भी मृत्यु हो गई. गोलीबारी में होशियार सिंह और उनकी पत्नी की भी मौत हो गई.
इस चरमपंथी हमले में होशियार सिंह की बेटी और उनके घर पर आए एक मेहमान भी घायल हो गए.
मुठभेड़ में दो जवान गंभीर रूप से घायल हो गए. आसपास रहने वाले लोगों का कहना है कि मुठभेड़ में कई अन्य पत्रकार भी घिर गए थे.
सुरक्षा बलों ने फ़िलहाल सैलानियों को इस इलाक़े में जाने से रोक दिया है. सुरक्षा बलों का मानना है कि गुरुवार को हुई घुसपैठ में ये चरमपंथी भारत प्रशासित कश्मीर में दाखिल हुए होंगे.
हालांकि पहले सुरक्षा एजेंसियों ने इस बात से इनकार किया था कि गुरुवार को भारत और पाकिस्तान की तरफ़ से हुई गोलीबारी में कोई चरमपंथी भारत प्रशासित कश्मीर में दाखिल हुआ था.

Friday, May 9, 2008

एचआईवी ग्रस्त माँग रहे है 'इच्छा मृत्यु'


राजस्थान में एचआईवी पॉज़िटिव लोगों ने सरकार पर उपेक्षा का आरोप लगाया है. उन्होंने 'इच्छा मृत्यु' की इजाज़त मांगी है.
ये लोग अपनी माँगों को पूरा करवाने के लिए जयपुर में धरने पर बैठ गए हैं.
इनका आरोप है की सरकार ज़रूरी दवाओं की व्यवस्था नहीं कर रही है. वहीं सरकार ने इन आरोपों को ग़लत बताया है.
राज्यपाल को ज्ञापन
एचआईवी पॉज़िटिव पीड़ितों की संस्था के अध्यक्ष ब्रजेश दुबे ने बीबीसी को बताया की 20 पीड़ितों ने राज्यपाल को एक ज्ञापन भेजकर 'इच्छा मृत्यु' की अनुमति मांगी है.
दुबे कहते है, "हम अभाव और उपेक्षा की इस ज़िन्दगी से परेशान हो गए हैं. इस तरह की जिंदगी से अब हम तंग आ चुके हैं. कदम-कदम पर हमे अपमानित किया जा रहा है."
हम अभाव और उपेक्षा की इस ज़िंदगी से परेशान हो गए हैं. इस तरह की जिंदगी से अब हम तंग आ चुके हैं. कदम-कदम पर हमे अपमानित किया जा रहा है

एचआईवी ग्रस्त लोगों की संस्था
उधर एड्स नियंत्रण के लिए ज़िम्मेदार एक वरिष्ठ अधिकारी डॉक्टर अरुण बजाज कहते हैं, "सरकार ने अपने स्तर पर सभी व्यवस्था कर रखी है. हमने दवाओं और ज़रूरी चिकित्सा की माकूल व्यवस्था कर रखी है."
बजाज कहते हैं, "मेरे ख़्याल में दवाओं की कोई कमी नहीं है. जयपुर के अलावा ज़िला स्तर पर भी दवाओं की पर्याप्त व्यवस्था है."
राजस्थान नेटवर्क फ़ॉर पॉजिटिव पीपुल के मुताबिक, राजस्थान में कोई दो लाख लोग एड्स पीड़ित हैं.
सरकार ने अपने स्तर पर सभी व्यवस्था कर रखी है. हमने दवाओं और जरूरी चिकित्सा की माकूल व्यवस्था कर रखी है

एड्स नियंत्रण के उपनिदेशक
नहीं मिलता है काम
प्रकाश एक एड्स पीड़ित हैं. वह अपना दर्द बताते-बताते रो पड़ते हैं.
उन्होंने कहा, "मेरे चार बच्चे है. हम बड़ी मुश्किल में हैं. कही रोज़गार नहीं मिलता हैं. अगर सरकार हमे ग़रीबी रेखा की सूची में शामिल कर ले तो थोडी मदद हो जाएगी. वरना ऐसे घुट-घुट कर कैसे जिएँगे?."
सुरभी (बदला हुआ नाम) कहती हैं, "मेरी बेटी भी इस रोग से ग्रस्त है. समाज जब उपेक्षा करे तो सरकार का बड़ा सहारा होता है. मगर अब सरकार ही ध्यान नही दे रही है. हम माथे पर लगे इस दाग के साथ समाज में कहाँ जाकर खडे होंगे?"
इन पीडितों का कहना है की अगर सरकार सहारा दे तो उनकी ज़िंदगी की राह कुछ आसन हो जाएगी.

नारायण बारेठ

बीबीसी संवाददाता, जयपुर

Thursday, May 8, 2008

भारत के खली ने मचाई खलबली

GooD News !
एक भीमकाय इंसान जो कभी हिमाचल प्रदेश के खेतों में काम करता था और अब अंतरराष्ट्रीय कुश्ती का चमकता सितारा है. जी हाँ, हम बात कर रहे हैं खली की.
अमरीका के अटलांटा शहर में रहने वाले खली का असली नाम दलीप सिंह राणा है.
खली कुछ हॉलीवुड फ़िल्मों में काम कर चुके हैं और अब उन्हें बॉलीवुड से भी काम के प्रस्ताव आ रहे हैं.
उन्होंने वर्ष 2005 की फ़िल्म 'द लॉंगेस्ट यार्ड' और 'गेट स्मार्ट' जैसी फ़िल्मों में काम किया.
पंजाबी मुंडा
छत्तीस वर्षीय राणा आजकल भारत में हैं. वो अपना कुछ समय घर में बिताएंगे और अपने जीवन पर बनने वाली वृत्तचित्र के लिए शूटिंग भी करेंगे.
दलीप सिंह राणा अमरीका में डब्ल्यूडब्ल्यूई में लड़ने वाले पहले भारतीय हैं. वो दुनियाभर में मशहूर डब्ल्यूडब्ल्यूई योद्धा हल्क होगन और द रॉक के साथ काम करते हैं.
खली सात फ़ीट तीन इंच लंबे हैं और उनका वज़न 420 पाउंड है
खली के बारे में डब्ल्यूडब्ल्यूई की वेबसाइट कहती है कि वो भारत के रहने वाले हैं, सात फ़ीट तीन इंच लंबे हैं और उनका वज़न 420 पाउंड है.
वेबसाइट का कहना है कि खली भारत के जंगल में घूमते हैं और उन्हें अजगरों से डर नहीं लगता. वेबसाइट की माने तो 'महान खली' पश्चिम बंगाल के बाघों से भी दो-दो हाथ कर चुके हैं.
खली कहते हैं कि अमरीका के लोगों ने कभी सोचा भी नहीं था कि डब्ल्यूडब्ल्यूई में कभी कोई भारतीय भाग लेगा, लेकिन वे इसका मज़ा लूट रहे हैं.
बढ़ती लोकप्रियता
दो वर्ष पहले अमरीका की सरकार डब्ल्यूडब्ल्यूई के पहलवानों को इराक में सैनिकों के मनोरंजन के लिए ले जाना चाहती थी.
इन पहलवानों की एक शुरुआती सूची बनाई. इस शुरुआती सूची में खली का भी नाम था. हालांकि अंतिम सूची में उनका नाम नहीं था.
उनका हाथ इतना विशाल है कि अगर आप उनसे हाथ मिलाएँ तो आपका हाथ कहीं खो जाता है और वो चाहें तो अपने हाथ से आपका सर मसलकर रख दें

स्टीन कैरेल, हॉलीवुड कलाकार
खली के प्रवक्ता अमित स्वामी हैं, वो उत्तरी राज्य हरियाणा के रहने वाले हैं और ख़ुद एक बॉडीबिल्डर हैं.
अमरीका के फ़िल्म कलाकार स्टीन कैरेल ने खली के साथ ‘गेट स्मार्ट’ फ़िल्म में काम किया था.
वो कहते हैं,'' उनका हाथ इतना विशाल है कि अगर आप उनसे हाथ मिलाएँ तो आपका हाथ कहीं खो जाता है और वो चाहें तो अपने हाथ से आपका सर मसलकर रख दें.''
कैरेल कहते हैं कि खली बेहद मधुर स्वभाव के हैं और ‘मुझे नहीं लगता कि उन्हें पता था कि वो एक फ़िल्म में काम कर रहे हैं.’
उधर खली उर्फ़ राणा का कहना है कि वो सिर्फ़ चुनी हुई भारतीय फ़िल्में ही करेंगे.
खली के शुरुआती दिनों की बात करें तो वो रोड परियोजनाओं के लिए पत्थर तोड़ने का काम करते थे.
उनके गाँव धिराना की महिलाएं उन्हें भारी भरकम काम, जैसे जानवर को उठाकर एक जगह से दूसरी जगह रखना जैसे काम करवाती थीं.
मुश्किलें
खली का जीवन उस वक्त बदला जब वो अपने दोस्त स्वामी के साथ दिल्ली के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर अपने पसंदीदा पहलवान डोरियन येट्स से मिलने गए.
खली का कहना है कि जिस मुक़ाम पर हैं, वहाँ पहुंचना बेहद मुश्किल था
येट्स खली का डीलडौल देखकर बेहद प्रभावित हुए.
जल्द ही खली अपनी किस्मत आज़माने जापान रवाना हो गए. वहाँ बिताए एक साल में उन्होंने कई ‘झूठी’ लड़ाइयाँ लड़ी.
उसके बाद वह अमरीका चले गए जहाँ उन्होंने ऐसी लड़ाइयों को पेशा बना लिया.
खली का कहना है कि जिस मुक़ाम पर हैं, वहाँ पहुंचना बेहद मुश्किल था.
आराम की ज़िंदगी
डब्ल्यूडब्ल्यूई कार्यक्रम वालों को राणा का नया नाम ढूढ़ने के लिए बहुत मेहनत करनी पड़ी. किसी ने उसे जायंट सिंह कहा तो तो किसी ने उसे भीम नाम से संबोधित किया.
किसी ने कहा कि राणा का नाम भगवान शिव रखा जाए, लेकिन इस नाम को भी ख़ारिज कर दिया गया क्योंकि इससे भारत में रहने वाले लोगों की भावनाओं को ठेस पहुँच सकती थी.
फिर राणा ने माँ काली का नाम सुझाया और उनकी विनाशकारी शक्तियों के बारे में बताया. सबको यह नाम बेहद पसंद आया. लेकिन विदेशियों ने उनका नाम खली कर दिया.
राणा का कहना है कि वो शाकाहारी हैं और तंबाकू और शराब से दूर रहते हैं.
वो कहते हैं कि वह अपनी पत्नी हरमिंदर कौर के साथ एक साधारण ज़िंदगी व्यतीत करते हैं.
राणा यानि खली का कहना है कि वह डब्ल्यूडब्ल्यूई से कुछ और वर्ष जुड़े रहेंगे.

Friday, May 2, 2008

पाक में एसएमएस भेज मांगते हैं भीख

Go od News!
इस्लामाबाद। मोबाइल फोन आज हर किसी के काम आ रहा है। अपहर्ताओं ही नहीं, भिखारियों के भी। अपहर्ता फोन के जरिए फिरौती मांगते हैं तो भिखारी भीख मांगने के लिए लोगों को एसएमएस भेजते हैं। पाकिस्तान में भिखारियों ने मोबाइल फोन को अपने धंधे का हथियार बना लिया है।
पाकिस्तान के भिखारी हाईटेक जरूर हो गए हैं, लेकिन भीख मांगने का उनका अंदाज वही पुराना है। एसएमएस के जरिए भीख मांगते हुए भी वे अल्लाह को नहीं भूलते। उन्हीं के नाम पर भीख देने को कहते हैं। मसलन, लोगों के पास इस तरह के एसएमएस पहुंचते हैं, 'मैं एक गरीब आदमी हूं। मेरी बेटी अस्पताल में भर्ती है। यदि आप अल्लाह में यकीन रखते हैं तो कृपया मुझे दस रुपये देने का कष्ट करें। अल्लाह आपको बरकत देगा और हर तरह की परेशानियों से दूर रखेगा।'
हाईटेक भिखारियों ने अपनी औकात भी ज्यादा नहीं बढ़ाई है। वे एसएमएस भेज कर ज्यादा से ज्यादा सौ रुपये की ही मांग रखते हैं। व्यवसायी मुहम्मद उस्मान का दावा है कि उन्हें हर दिन ऐसे दस मैसेज मिलते हैं। अखबार 'डेली टाइम्स' ने उस्मान के हवाले से लिखा है, 'इन मैसेज को नजरअंदाज करना मुश्किल है।'
दरअसल, अल्लाह के नाम पर मांगे जाने पर कई लोग असमंजस में पड़ जाते हैं। यूनुस नाम के एक शख्स ने तो इन अनाम संदेशवाहकों को पैसे भेजना भी शुरू कर दिया है। उनका कहना है, 'यह जाने बिना कि मैसेज किसने भेजा है, मैं अल्लाह के नाम पर पैसे दे देता हूं।' हालांकि उनका मानना है कि भिखारियों को लोगों को ब्लैकमेल नहीं करना चाहिए।